संजय कुमार बाठला
जनहित में बनाया गया सरकारी विभाग ही अगर जनहित, जनकल्याण के कार्यों की जगह जनता को परेशान करने में सलग्न हो जाए तो कैसे होगा जनता का हित
इस श्रृंखला में आज हम बात और विश्लेषण करते हैं दिल्ली में सबसे अधिक जनता को प्रयोग में आने वाले सरकारी विभाग “दिल्ली परिवहन विभाग” के बारे मे। “कितना है जनहितकारी?”
जी हां दिल्ली में शायद ही कोई परिवार हो जिस को इस विभाग से कार्य नहीं पड़ता हो। सभी परिवारों में किसी ना किसी सदस्य को इस विभाग से अवश्य कार्य पड़ता ही है।
सबसे प्रथम हम इस विभाग की आला अधिकारी आयुक्त परिवहन को दिल्ली की समस्त जनता की तरफ से पूर्व में रहे आयुक्त द्वारा गैर कानूनी तरीके से बंद किए गए क्षेत्रीय कार्यालयों को जनता के लिए फिर से कार्यशील करने के प्रति दिल से धन्यवाद करते हैं।
जनहित के लिए बना यह सरकारी विभाग कितना जनहितकारी है अब इसका विश्लेषण करते हैं जमीनी स्तर पर, जनता द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर
1. दिल्ली में जनता को सुखद, सुरक्षित, जरूरत अनुसार दरवाजे से दरवाजे तक समयानुसार सार्वजनिक सवारी सेवा उपलब्ध करवाना इस विभाग का पहला सबसे बड़ा और प्रमुख दायित्व है।
जिस के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय भारत और उच्च न्यायालय दिल्ली ने भी कई बार दिशा निर्देश जारी किए पर दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी सत्ता में आई तब से लेकर आज तक जब की आज भारतीय जनता पार्टी सत्ता पर विराजमान हैं यह सेवा दिन प्रतिदिन चरमराती चली गई और दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
आपकी जानकारी हेतु बता दें सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया ने दिल्ली के व्यवसायिक सार्वजनिक सवारी वाहन सेवा के प्रति स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर कहा हुआ है की दिल्ली में सार्वजनिक सवारी सेवा दो अलग अलग श्रेणियां में 40 / 60 की रेशों में ही चालित की जाए, और यह दिशा निर्देश इसलिए सु मोटो लेकर जारी किया गया था क्योंकि दिल्ली परिवहन निगम कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर दिल्ली में सार्वजनिक सवारी सेवा का चक्का जाम कर दिया था और उस समय सिर्फ दिल्ली परिवहन निगम ही दिल्ली में सार्वजनिक सवारी सेवा प्रदान करती थी। माननीय सर्वोच्च न्यायालय भारत के दिशा निर्देश के बाद दिल्ली में प्राइवेट वाहन मालिकों को स्टेज कैरेज परमिट अर्थात दिल्ली में सार्वजनिक सवारी सेवा प्रदान करने के लिए अधिकृत परमिट जारी किए गए थे।
आज दिल्ली परिवहन विभाग ने फिर से दिल्ली की सार्वजनिक सवारी सेवा को सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के दिशा निर्देश को दरकिनार कर एक ही श्रेणी को पूरा सार्वजनिक सवारी सेवा का दायित्व सौंप दिया जो कभी भी जनता के लिए अति दुखदायी तो होगा ही साथ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय भारत के दिशा निर्देश की अवहेलना भी,
अब आप समझ ही सकते हैं की परिवहन विभाग अपना प्रमुख दायित्व जनहित में निभा रहा है या प्रिय उद्योगपतियों / उद्योग घरानों के पक्ष में
2. दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कार्य इस विभाग का है दिल्ली की सड़को पर अनाधिकृत एवं बिना मान्य दस्तावेजो के चलने वाले वाहनों पर नकेल कस कर जनता को सुरक्षित सड़के और वाहन सेवा उपलब्ध कराना
दिल्ली परिवहन विभाग ने अपने इस दायित्व को निभाने के लिए अपनी प्रवर्तन शाखा बना रखी है और माननीय सर्वोच्च न्यायालय भारत के दिशा निर्देश पर दिल्ली यातायात पुलिस को भी इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया है, अर्थात दिल्ली के चप्पे चप्पे पर जांच संभव।
पर सच्चाई इसके विपरीत है, सच्चाई यह है की दिल्ली में जाम लगवाने, दिल्ली में अनाधिकृत वाहनों के आवाजाही, दिल्ली में अनाधिकृत पार्किंग, दिल्ली में मान्य दस्तावेजो के बिना वाहन और बिना पंजीकरण के वाहनों के सड़को पर तेजी से बढ़ते रहने में इन्हीं दोनों एजेंसियों के साथ दिल्ली नगर निगम और एनडीएमसी का हाथ है।
जब प्रवर्तन शाखाओं के लिए कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी ही मार्केट, व्यवसायिक केंद्री, बैंक्विट हाल इत्यादि के बाहर सड़को पर वाहनों को अनाधिकृत पार्किंग करवाने में मददगार बनने लगे और दिल्ली नगर निगम और एनडीएमसी सड़को पर पार्किंग शुल्क लगा कर पार्किंग करवाने लगे तो सुरक्षित, जाम मुक्त सुरक्षित सड़के कैसे उपलब्ध हो सकती हैं
3. तृतीय प्रमुख कार्य वाहनों की सही जांच कर पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करना
परिवहन विभाग की पंजीकरण शाखाओं में विभाग द्वारा पंजीकरण के प्रति जारी एसओपी का उल्लंघन कर वाहनों को पंजीकरण जारी होना आम बात है जो जनता को सड़को पर असुरक्षित करने के लिए सक्षम है।
आप को याद ही होगा अभी कुछ दिन पहले दिल्ली परिवहन विभाग मुख्यालय में चालित व्यावसायिक गतिविधियों के वाहनों के पंजीकरण शाखा के डीटीओ द्वारा दिल्ली में बेखौफ तरीके से स्लीपर कोच बसों का पंजीकरण कर दिया गया था और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की उसके बाद भी विभाग द्वारा उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इसी अधिकारी द्वारा इस शाखा से व्यावसायिक गतिविधियों में चलने वाले लोडर वाहनों के जो पंजीकरण हुए हैं वह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वाहन जांच एजेंसी द्वारा जारी प्रमाण पत्र, परिवहन विभाग द्वारा जारी स्टेट अप्रूवल के अनुसार नहीं होने पर भी किए जाते रहे और डीटीओ द्वारा कभी भी इसकी जानकारी होते हुए भी प्रवर्तन शाखा या वाहन जांच शाखा को इन पर कार्यवाही करने के लिए बोलना भी पसंद नहीं किया अर्थात निजी कंपनियों को फायदा और वह जनता के जान माल की कीमत पर,
पर विभागीय कार्रवाई जीरो अर्थात कितने जनहित में सलग्न विभाग
दिल्ली में कार्यरत सभी पंजीकरण शाखाओं में ई रिक्शे का पंजीकरण वह भी पंजीकरण की एसओपी को दरकिनार कर और जांच पर पता चला की विभाग की आनलाइन वाहन सेवा पोर्टल में ही पिछले कई वर्षों से ई रिक्शा चालक के प्रशिक्षण प्रमाणपत्र को अपलोड की सुविधा ही जान बूझ कर हटा रखी हैं, अर्थात बिना प्रशिक्षित चालक को भी चालक लाइसेंस जारी करने का प्रावधान, इससे आप समझ ही सकते हैं की कितने जनहित में कार्यरत है दिल्ली परिवहन विभाग।
4. दिल्ली की जनता को मनपसंद वाहन नंबर प्राप्त करने की सुविधा
इस सुविधा का फायदा दिल्ली की जनता को सीधे कभी भी उपलब्ध नहीं हो इसके लिए परिवहन विभाग ने इसके लिए दो तरह की एप्लीकेशन बनवा दी और जनता को वाहन डीलर को उसकी मनपसंद राशि देने के लिए बाध्य कर दिया,
अगर आप किसी भी नंबर को ऑनलाइन प्राप्त करना चाहते हैं तो पोर्टल पर लिखा मिलेगा यह नंबर उपलब्ध नहीं है जब की वही नंबर दिल्ली में वाहन बेचने वाले वाहन डीलर आपको उपलब्ध करवा देंगे पर अपनी शर्तों पर
है ना कितना जनहित, जनकल्याण में कार्यरत दिल्ली परिवहन विभाग
मुद्दे, सबूत और जनहित के बहुत से कार्य अभी भी शेष हैं पर उम्मीद है आपसे जितने मुद्दे साझा किए गए हैं उनसे आप परिवहन विभाग दिल्ली की जनहित जनकल्याण कार्यों को भली भांति समझ गए होंगे,
शेष अन्य अंक में

