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बजट से पहले का अनुमान
बजट 2026 के पूर्वानुमान
दिल्ली में डीजल यूरो IV वाहनों को एक साल की और दी गई अनुमति
परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिक्कारा द्वारा जारी सीएक्यूएम जानकारी
*स्पेशल ई-रिक्शा संचालन हेतु डीएल दिया जाता है जबकि अधिकांश ई-रिक्शा संचालकों के पास डीएल है ही नहीं।* कौन जिम्मेदार ?
संजय बाटला 

क्या आला अधिकारी (*परिवहन आयुक्त*) परिवहन विभाग दिल्ली की जानकारी में है की ई रिक्शा पंजीकरण के लिए मालिक के नाम पर ही चालक लाइसेंस और बेज का होना अति आवश्यक है और एक व्यक्ति के नाम एक ही ई रिक्शा पंजीकरण किया जा सकता है क्योंकि ई रिक्शा खरीदने वाले को राज्य सरकार की तरफ से सब्सिडी देने का आदेश है।

*दिल्ली की सड़को पर चलने वाले अधिकतर ई रिक्शा चालकों के पास चालक लाइसेंस ही उपलब्ध नहीं हैं और अगर लाइसेंस नहीं है तो बेज होने का तो सवाल ही नहीं उठता जो की सार्वजनिक सवारी वाहन चलाने के लिए अति अनिवार्य दस्तावेज है।*

आप की जानकारी हेतु बता दें वाहन डाटा बेस के अनुसार दिल्ली में ऐसे कई व्यक्तियों के नाम उपलब्ध है जिनके नामों पर अनगिनत रिक्शा पंजीकृत है। अब सवाल यह उठता हैं की एक व्यक्ति एक से ज्यादा ई रिक्शा चला कैसे सकता है और कानून के अनुसार भी एक व्यक्ति के नाम पर मात्र एक ई रिक्शा पंजीकरण होना निश्चित किया गया था तो 
1. एक ही आदमी के नाम पर एक से अधिक ई रिक्शे पंजीकृत हुए कैसे ? 
2. एक वाहन लाइसेंस पर अनगिनत पंजीकृत ई रिक्शा कैसे चल सकते है, *अर्थात दिल्ली की सड़को पर बिना लाइसेंस के चलने वाले ई रिक्शे का मुख्य कारण स्वयं परिवहन विभाग के अधिकारी हैं।*
3. ई-रिक्शा सवारियों के लिए हैं, किन्तु लोग इनमें सामग्री भरकर चला रहे हैं।
4. बिना पंजीकरण का ई रिक्शा या कोई भी वाहन सड़को पर गतिविधि नहीं कर सकता और इसके प्रति दिल्ली उच्च न्यायालय का भी आदेश जारी है पर दिल्ली की सड़को पर पंजीकृत से अधिक मात्रा में बिना पंजीकृत वाहन व्यवसायिक गतिविधि में शामिल है।
5. बिना मान्य वाहन जांच प्रमाण पत्र के वाहन व्यावसायिक गतिविधियों में चलना एमवी एक्ट के अनुसार मना है पर दिल्ली की सड़को पर ऐसे वाहन बेखौफ व्यवसायिक गतिविधि में चलते हुए पाए जाते है 
6. बिना वैलिड वाहन इंश्योरेंस के सड़को पर वाहन व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल हैं 
7. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा ई रिक्शा के चलने के लिए प्रतिबंधित सड़को पर बेखौफ चलते नजर आते है।
*क्या कारण हैं की दिल्ली की सड़को पर निजी नंबरों के, बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहनो के साथ बिना वैलिड एमवी एक्ट के अनुसार अनिवार्य दस्तावेजों और बिना पंजीकृत वाहन हर गली कूचे और सड़को पर बेखौफ दौड़ते नजर आ रहे हैं पर उन के खिलाफ मोटर वाहन नियम के अनुसार कार्यवाही करने को कोई तैयार नहीं ?*

क्या दिल्ली परिवहन विभाग, दिल्ली यातायात पुलिस और प्रवर्तन शाखा वालो पर कोई राजनीतिक दबाव है या परिवहन विभाग और दिल्ली यातायात पुलिस के आला अधिकारियों के निर्देश है की इन पर कार्यवाही नहीं की जाए।

या दिल्ली यातायात पुलिस और प्रवर्तन शाखा परिवहन विभाग के अधिकारी की नजर में ना तो मीटर वाहन नियमों, ना ही उच्च न्यायालय दिल्ली के आदेशों और ना ही परिवहन विभाग के आला अधिकारी द्वारा जारी निर्देशों का कोई डर है जो यह सभी को दरकिनार कर सिर्फ गिनती दिखाने के लिए छूट मुट कमियों वाले वाहनों के चालान काट कर अपनी ड्यूटी को दिखा कर दिल्ली की सड़को पर अवैध वाहनों को बेखौफ चलवाने में मददगार बन कर जनता के जीवन को असुरक्षित बना रहे है और सब कुछ जानते और देखते हुए भी आला अधिकारियों के अतिरिक्त दिल्ली सरकार, उपराज्यपाल दिल्ली और उच्च न्यायालय है चुप।

*क्या दिल्ली की सड़को पर चलने वाले भारत एवम् विदेशी पर्यटक के जान माल की कोई कीमत इनकी नजर में नहीं, बड़ा सवाल ?*
दिल्ली की सड़को पर बिना वैध चालक लाइसेंस के कैसे चल रहे हैं ई रिक्शा
*भारत सरकार, राज्य सरकारो के साथ जनता को अरबों रुपयों का चूना लगाने वालो के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने पर भी गृह मंत्रालय क्यों है चुप ?*
पिंकी कुंडू सह संपादक परिवहन विशेष 

*दिल्ली परिवहन विभाग, दिल्ली यातायात पुलिस और दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभक्त से करोड़ों का वाहन स्क्रैपिंग घोटाला*

*सरकारी विभाग के आला अधिकारी, प्रवर्तन एजेंसियां और स्क्रैपर्स जांच के घेरे में*

दिल्ली में जीवन-काल समाप्त हो चुके वाहनों (ईएलवी) के निपटान में करोड़ों रुपये का विशाल घोटाला जग जाहिर है। 

प्रवर्तन एजेंसियों (दिल्ली परिवहन विभाग प्रवर्तन शाखा, दिल्ली यातायात पुलिस और दिल्ली नगर निगम प्रवर्तन शाखा) और पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं (आरवीएसएफ) के बीच गहरी मिलीभगत का संदेह स्पष्ट नजर आ रहा है। 

जाली प्रमाणपत्रों, ज़ब्त किए गए वाहनों के अनियमित निपटान और सरकारी दिशानिर्देशों के उल्लंघन से जुड़े इस घोटाले से कथित तौर पर सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।

यह विवाद उस दिन से दिल्ली में शुरू हो गया था जिस दिन से दिल्ली परिवहन विभाग ने एनजीटी और माननीय सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के आदेश को मानने की बात कह दिल्ली में 10 साल पूरे कर चुके डीजल वाहन और 15 साल पूरे हो चुके अन्य फ्यूल मोड से चलने वाले वाहनों को उठवाकर दिल्ली से बाहर पंजीकृत वाहन स्क्रैप डीलरो को सुपुर्द करना शुरू किया था। इस कार्यवाही से रूष्ट होकर जनता दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने लगी और अनगिनत शिकायतों को मद्देनजर रखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली परिवहन विभाग को इसके लिए एक नीति बनाने और उसे जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश जारी करना पड़ा, जिस कारण दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा 20 फ़रवरी, 2024 वाहन स्क्रैप नीति घोषित की। परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर जारी इस नीति का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों को लागू करना था जिनमें 10 साल से ज़्यादा पुराने डीज़ल वाहनों और 15 साल से ज़्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों को स्क्रैप करना अनिवार्य है।

*दिशानिर्देशों में स्पष्ट प्रावधान दिए गए: पैनलबद्ध आरवीएसएफ में स्क्रैपिंग का समान वितरण, ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रियाएँ, और सरकारी खातों में बिना दावे वाले स्क्रैप मूल्य को अनिवार्य रूप से जमा करना।*

इसके अलावा सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 18 अक्टूबर, 2024 को जारी एक राजपत्र अधिसूचना के तहत सरकारी ज़ब्त वाहनों के लिए जमा प्रमाणपत्र (सीओडी) पर प्रोत्साहनों पर स्पष्ट रूप से रोक और उनके व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह साफ नजर आता है की कई आरवीएसएफ एवम् प्रवर्तन अधिकारियों ने मिलीभगत करके ज़ब्त किए गए वाहनों के बदले जाली जमा प्रमाणपत्र जारी कर उसके द्वारा प्रोत्साहन राशि प्राप्त की जो की अधिसूचना का सीधा उल्लंघन के साथ भारत सरकार और राज्य सरकारों के राजस्व में चुना लगाने का सबूत है।

अधिसूचना के अनुसार वाहन स्क्रैप सीओडी केवल उन वाहन मालिकों को जारी हो सकती हैं जो स्वेच्छा से अपने वाहनों को स्क्रैप करते हैं, जिससे उन्हें नए वाहन खरीदते समय भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन राशि का फायदा उपलब्ध हो सके। ज़ब्त किए गए वाहनों पर अवैध रूप से सीओडी जारी करके, स्क्रैपिंग कंपनियों ने सार्वजनिक धन की हेराफेरी की।

जानकार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 
1. एसजी जंकयार्ड एंड रीसाइक्लिंग एलएलपी 
2. पीकेएन मोटर्स 
3. भारत व्हीकल स्क्रैप फैसिलिटी 
4. गो ग्रीन ईएलवी हैंडलर्स 
5. ग्रांड ग्लोबल जंकयार्ड एंड रीसाइक्लिंग एलएलपी 
6. सरल ऑटो स्क्रैपिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड 
7. सेवन स्टार ऑटो स्क्रैपिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
8. सलेक्ट आटो एवम् अन्य कई स्क्रैप डीलरो ने ना तो कारण बताओ नोटिस के बाद विभागों में पैसे जमा कराए और स्पष्ट प्रतिबंधों के बावजूद अवैध सीओडी जारी किए जिनकी जांच करना बहुत ही आसान है पर फिर भी विभाग एवम् दिल्ली सरकार है चुप 

*दिल्ली परिवहन विभाग में तीन पहिया तीन सवारी के लिए अनिवार्य वाहन स्क्रैप सर्टिफिकेट की जांच में पाया गया की परिवहन विभाग के अधिकारी ने बिना प्रमाणपत्र की जांच किए नए तीन पहिया तीन सवारी वाहनो को खरीदने के आदेश जारी कर दिए, जब की सच्चाई यह है की वह वाहन स्क्रैप हुए ही नहीं हैं और स्क्रैप डीलर द्वारा जारी प्रमाणपत्र (सीओडी) पर डिजिटल हस्ताक्षर किए ही नहीं गए थे और डिजिटल हस्ताक्षर किए बिना वाहन पोर्टल पर वाहन स्क्रैप होना संभव ही नहीं है, अर्थात माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना के साथ विभाग द्वारा जारी एसओपी का खुला उल्लंघन* पूरी जानकारी परिवहन आयुक्त को होते हुए भी कोई कार्यवाही नहीं की गई।

हज़ारों ज़ब्त वाहनों का  निबटान कानूनी प्रक्रिया से करने की जगह प्रवर्तन शाखा एवम् विभाग के आला अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए, वाहनों को सीधे आरवीएसएफ को सौंप दिया जिस कारण सरकारी राजस्व में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

स्क्रैपिंग नीति के खंड 10(iii) के अनुसार, यदि 15 दिनों के भीतर वाहन मालिकों द्वारा स्क्रैप मूल्य के प्रति दावा नहीं किया जाता है, तो आरवीएसएफ को स्क्रैप की राशि सरकारी खातों में जमा करनी होगी। फिर भी अधिकतर आरवीएसएफ कंपनियों ने विभागों में भुगतान नहीं किया और विभागों द्वारा जब कारण बताओ नोटिस जारी किए गए तो भी बिना किसी वसूली कार्रवाई के नज़र अंदाज़ कर दिया गया।

महिंद्रा एमएसटीएस री-साइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड को एक उल्लंघन के लिए काली सूची में डाल दिया गया जबकि गो ग्रीन ईएलवी हैंडलर्स, जिसे विस्फोटक अधिनियम के तहत एक केस प्रॉपर्टी वाहन को कबाड़ करते हुए पकड़ा गया था उसको विभाग ने काली सूची में शामिल करने की जगह उससे बेरोकटोक अपना कारोबार जारी रखा। चोरी के वाहनों के साथ पकड़े जाने के बाद भी एक ही परिवार के सदस्यों द्व
*सरकारी विभाग के आला अधिकारी, प्रवर्तन एजेंसियां और स्क्रैपर्स जांच के घेरे में*
*क्या जनता की सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली की सड़को पर चलवाए जा रहे हैं  अनाधिकृत वाहन, बड़ा सवाल?*
पिंकी कुंडू, सह - संपादक परिवहन विशेष के द्वारा 

*क्या जनता की सुरक्षा, सुविधा और सुखद सार्वजनिक सेवा के प्रति सरकार और विभाग की देन हैं यह अनाधिकृत वाहन ?*

*कौन है इनको दिल्ली की सड़को पर खुले आम बेखौफ चलवाने में मददगार ?* 

सभी इस बात से परिचित है की दिल्ली में पूर्व में रही आम आदमी पार्टी सरकार और तत्काल में तख्त संभाल रही भाजपा सरकार जनता को सार्वजनिक सवारी वाहन सेवा उपलब्ध करवाने में पूरी तरह नाकाम रही है।

*राज्य में जनता की जरूरत अनुसार सार्वजनिक सवारी वाहन सेवा उपलब्ध करवाना राज्य सरकार का पहला दायित्व है।* 

दिल्ली में जनता को सुरक्षित समयानुसार सार्वजनिक सवारी वाहन सेवा उपलब्ध करवाने के लिए दिल्ली परिवहन निगम का गठन किया गया था पर पिछले 14 सालों में दिल्ली सरकार ने दिल्ली परिवहन निगम को एक भी वाहन ना तो खरीदने दिया और ना ही खरीद कर दिया। 

भारत देश में सड़को पर चलने के लिए किसी भी वाहन की अधिकतम आयु 15 वर्ष घोषित है और उसके बाद उसे स्क्रैप करना आवश्यक हैं। दिल्ली सरकार द्वारा जनहित में जो सार्वजनिक सवारी वाहन उपलब्ध रहने चाहिए उन्हें जानबूझ कर पिछले 14 सालों से नहीं करवाया अर्थात दिल्ली सरकार ने जान बूझकर दिल्ली की जनता को अनाधिकृत/ गैर कानूनी तरीके से चलने वाले सवारी वाहनों पर सफर करने की और धकेला और यही कारण है की दिल्ली की सड़को पर अनाधिकृत रूप से चल रहे सार्वजनिक सवारी सेवा में वाहनों पर कोई कार्यवाही प्रवर्तन शाखाओं (दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली यातायात पुलिस) द्वारा नहीं करने का। दूसरे शब्दों में कहे तो उनके खिलाफ दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग कार्यवाही नहीं चाहते।

*दिल्ली में बढ़ते हुए महिलाओं से वाहनों में छेड़खानी और लूटपाट के मामलों का भी मुख्य कारण अनाधिकृत वाहनों का सड़को पर चलना है पर राज्य सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है क्योंकि उनकी ही गलतियों का परिणाम है यह जो जनता को झेलना पड़ रहा है।*

1. दिल्ली के किसी भी क्षेत्र में सड़को पर चले जाए आपको वहां बाहरी निजी नंबरों के वाहन सवारी बिठाते और उतारते साफ नजर आ जाएंगे पर दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली यातायात पुलिस को वहां उपस्थित रहते हुए भी यह वाहन नजर नही आते। 

2. दिल्ली की सड़को पर *"बिना पंजीकरण"* के वाहन खुले आम सवारियों को बैठाते और उतारते नजर आ जाएंगे पर दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली यातायात पुलिस को वहां उपस्थित रहते हुए भी बिना पंजीकरण के चलते वाहन नजर नही आते। 

आप की जानकारी हेतु बता दें मोटर वाहन नियम के अनुसार बिना पंजीकरण वाहन सड़को पर चल नहीं सकते और माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा भी आदेश पारित है की बिना पंजीकरण का वाहन दिल्ली की सड़को पर सवारी सेवा में चलता नहीं पाया जाना चाहिए। इसके बावजूद दिल्ली की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी सड़कों पर 24 घंटे आप बिना पंजीकरण के वाहनों को व्यवसायिक गतिविधि में शामिल देख सकते हैं। 

*अब आप ही बताए गैर कानूनी वाहन व्यावसायिक गतिविधियों में कार्य करते हुए सब को दिख रहे है पर दिल्ली सरकार, दिल्ली परिवहन विभाग, दिल्ली यातायात पुलिस और दिल्ली पुलिस को नजर नहीं आ रहे, आखिर क्या कारण है* जिनके कारण जनता असुरक्षित होते हुए भी इनका प्रयोग करने पर मजबूर हैं।

*दिल्ली सरकार और दिल्ली परिवहन विभाग को तत्काल प्रभाव से जनहित और जन सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए दिल्ली की सड़को पर बेखौफ दौड़ रहे अनाधिकृत वाहनों को हटाना और उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।*
*कौन है अनाधिकृत वाहनों को दिल्ली की सड़को पर खुले आम बेखौफ चलवाने में मददगार ?*
*क्या भारत सरकार इतनी पंगु हो गई है की स्वयं अपने द्वारा पारित विधेयक को ही लागू नहीं करवा पा रही या पारित विधेयक को लागू करना / करवाना ही नहीं चाहती ?*

वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा विधि विधान सर्वसम्मति से' डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक' पारित किया था। इसके अनुसार, किसी भी संस्था को आपकी अनुमति के बिना आपका व्यक्तिगत डेटा उपयोग करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। किन्तु व्यवहार में यह विधेयक आज भी कागज़ों तक ही सीमित है। ना तो कॉल्स रुके हैं, ना ही डाटा की चोरी रुकी और ना ही डाटा की दलाली थमी है

*"वाहन, ड्राइविंग लाइसेंस और चालान डाटा का लीक होना"*,
पिंकी कुंडू सह संपादक परिवहन विशेष 

एक बार फिर आपके सामने वाहन, ड्राइविंग लाइसेंस धारकों के व्यक्तिगत डाटा के साथ-साथ चालान डाटा के लगातार लीक होने पर गंभीर चिंता व्यक्त करने के लिए लिख रहा हूँ, जिसे अभी भी टेलीग्राम चैनलों पर खुलेआम शेयर किए जा रहा है और बेचा जा रहा है। हम आपको पहले भी सबूतों के साथ कई बार इससे अभाव कराते आए हैं और साथ ही संबंधित विभागों, मंत्रालयों एवम् मंत्रियों तक को शिकायतें भेजने के बावजूद, अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

हर बार नए सबूत उपलब्ध रहते हैं जो साफ़ तौर पर दिखाते हैं कि कैसे निजी डेटा का सार्वजनिक रूप से व्यापार किया जा रहा है। यह देखना बेहद निराशाजनक है कि साइबर अपराधी खुलेआम अपनी गतिविधियाँ को बेखौफ जारी रख रहा है और ऐसे कार्यों को जो क्राइम है को उसके द्वारा बेखौफ जारी रखते हुए भी संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई तत्परता या प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं दिखाई जा रही।

यहां यह कहते हुए बुरा भी लगता हैं पर और चुप रहना भी गलत है और बेहद चिंताजनक है कि इस डाटा की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार लोग बेपरवाह हैं और इन कर्ताओं से पूरी तरह से मिले हुए हैं। *आपकी जानकारी के लिए बता दे की यह एक कृत्रिम उत्पीड़न है — जो यह उद्घोष करता है कि हमारे नाम, दूरभाष अंक और आवश्यकताएं अब बाज़ार की संपत्ति बन चुकी हैं।*

इतनी बार सबूतों के साथ शिकायतों के बावजूद कार्यवाही नहीं करने के कारण जनता में यह संदेह भी बढ़ रहा है कि आंतरिक लापरवाही या उससे भी बदतर, जानबूझकर लीक - इस समस्या में योगदान दे रहे हैं।

सरकार क्या कर रही है? सरकार ने वर्ष 2023 में 'डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक' पारित किया था। इसके अनुसार, किसी भी संस्था को आपकी अनुमति के बिना आपका व्यक्तिगत डेटा उपयोग करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। किन्तु व्यवहार में यह विधेयक आज भी कागज़ों तक ही सीमित है। ना तो कॉल्स रुके हैं, ना ही डेटा की दलाली थमी है। *जब तक इन नियमों का पालन कराने के लिए कठोर दंड और स्पष्ट नियंत्रण नहीं होंगे, तब तक नागरिकों की निजता मात्र एक हास्यास्पद अवधारणा बनी रहेगी।*

*मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि इस मुद्दे को गंभीरता से लें और तत्काल एवं पारदर्शी कार्रवाई शुरू करें। लोगों का अधिकार है कि उनका डेटा सुरक्षित रहे और सिस्टम उन्हें बार-बार निराश नहीं कर रहा है।* 

उचित प्रतिक्रिया और वास्तविक कदम की अपेक्षा है, एक और चुप्पी की नहीं।
क्या भारत सरकार इतनी पंगु हो गई है अपने द्वारा पारित विधेयक को लागू नहीं कर पा रही
*दिल्ली परिवहन आयुक्त से जनहित में छोटा सा सवाल ?*
पिंकी कुंडू सह संपादक परिवहन विशेष 

क्या दिल्ली परिवहन आयुक्त को भी पूर्व में रहे दो आयुक्त पद पर कार्यरत आयुक्तों की तरह लगता हैं की परिवहन विभाग तकनीकी विभाग नहीं गैर तकनीकी विभाग है?
1. *क्या परिवहन आयुक्त की नजर में आर आर जो किसी भी पद पर कार्य करने के लिए अधिकारी के लिए बने हैं उनका कोई तथ्य नहीं है ?* 
2. *क्या परिवहन आयुक्त की नजर में माननीय सर्वोच्च न्यायालय भारत के द्वारा दिए गए दिशा निर्देश की भी कोई अहमियत नहीं है ?*  
3. *क्या परिवहन आयुक्त की नजर में सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देश की भी कोई अहमियत नहीं है ?*   
4. *क्या परिवहन आयुक्त की नजर में माननीय कैट द्वारा दिए गए दिशा निर्देश की भी कोई अहमियत नहीं है ?*  
5. *क्या परिवहन आयुक्त की नजर में दिल्ली सरकार के कानून विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देश की भी कोई अहमियत नहीं है ?*  

*कुल मिलाकर परिवहन आयुक्त द्वारा जिस बेखौफ तरीके से दिल्ली परिवहन विभाग के मुख्य रूप से कार्यशैली में बनी शाखाओं के पदों पर गैर तकनीकी अधिकारियों की नियुक्त किया है उससे से तो साफ नजर आ रहा हैं की परिवहन आयुक्त की नज़र में दिल्ली परिवहन आयुक्त में किसी भी तकनीकी अधिकारी की आवश्यकता ही नहीं है या दूसरे शब्दों में समझे तो परिवहन विभाग तकनीकी कार्य करता ही नहीं है जिस कारण इस विभाग को तकनीकी अधिकारियों की आवश्यकता ही नहीं है।*

दिल्ली में 2019 से 
1. बढ़ने वाला जाम,
2. जनता को सुखद सुरक्षित समयानुसार सार्वजनिक सवारी सेवा उपलब्ध नहीं होना,
3. दिल्ली में बढ़ते वाहन हादसे,  
4. दिल्ली की सड़को पर बिना परमिट, बिना इंश्योरेंस, बिना चालक लाइसेंस, बिना व्यवसायिक गतिविधि पंजीकरण नंबर, बाहरी राज्यों के निजी नंबर के वाहनों और बिना पंजीकरण के वाहनों द्वारा खुले आम व्यवसायिक गतिविधि करते पाया जाना 
*सिर्फ और सिर्फ परिवहन आयुक्त के द्वारा तकनीकी विभाग को गैर तकनीकी विभाग सिद्ध करने के कारण है।*

दिल्ली में स्वयं विभाग द्वारा वाहन के पंजीकरण के लिए अनिवार्य वाहन माडल स्टेट अप्रूवल के अनुसार वाहन निर्मित ना होने के बावजूद पंजीकरण कर देना भी परिवहन आयुक्त के द्वारा विभाग को गैर तकनीकी विभाग सिद्ध करने के कारण संभव हो रहा हैं।

माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तिपहिया तीन सवारी के लिए एक लाख की बंदिश लगाने पर तिपहिया तीन सवारी वाहनों को स्क्रैप हुए बिना नया वाहन रिप्लेस करने की पाबंदी होने के बावजूद *बिना तिपहिए तीन सवारी वाहनों के स्क्रैप* हुए नए तिपहिया तीन सवारी वाहनों को खरीदने की आज्ञा देकर स्वयं द्वारा बनाई एसओपी और माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना के साथ महिलाओं और जनता की सुरक्षा को दाव पर लगाना भी परिवहन आयुक्त के द्वारा विभाग को गैर तकनीकी विभाग सिद्ध करने के कारण संभव हो रहा हैं।

*पेट्रोल वाहनों में सीएनजी किट लगाने के बाद उसकी जांच गैर तकनीकी अधिकारी द्वारा करवाकर वाहन फ्यूल मोड बदलकर पंजीकरण देने से सड़को पर चलते वाहनों में आग लगने से जान माल की हो रही हानि के लिए भी परिवहन आयुक्त के द्वारा विभाग को गैर तकनीकी विभाग सिद्ध करने के कारण संभव हो रहा हैं।*

*निष्कर्ष* :- कुल मिलाकर दिल्ली परिवहन विभाग में जब तक तकनीकी पदों पर वापिस तकनीकी अधिकारी नियुक्त नहीं किए जाते *दिल्ली की सड़को पर जनता की सुरक्षा, जान माल की रक्षा सिर्फ और सिर्फ भगवान के हाथ में है ना की वाहन चालक के हाथ में, और इस सब का जिम्मेदार है दिल्ली परिवहन आयुक्त।*
*दिल्ली परिवहन आयुक्त से जनहित में छोटा सा सवाल?*
*पुराने वाहनों के नाम पर बैन और अपने प्रिय बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहन स्क्रैप डीलरो को पद के बल का दुरूपयोग कर जनता के वाहन जबरदस्ती उठवाकर देना दुनिया का सबसे बड़ा स्कैम* 

*कौन कौन है इसका हिस्सेदार, बड़ा सवाल ?*
संजय बाटला 

हमने आपको 8 अगस्त 2025 के अंक में सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी निर्देश कि कापी के साथ जानकारी उपलब्ध करवाई थीं की भारत देश में अलग अलग राज्यों से वाहन स्क्रैप डीलरो को प्राप्त मान्यता में से अनगिनत पंजीकृत वाहन स्क्रैप डीलरो को नीलामी द्वारा स्क्रैप के वाहन खरीदने पर सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पूरी तरह की रोक लगा दी गई है। *इसके पीछे जो कारण स्पष्ट रूप से सामने आए है वह सिद्ध करते हैं की वाहन स्क्रैप डीलरो ने परिवहन विभाग के आला अधिकारियों के साथ मिलकर जनता के साथ बड़ी लूट की है।* 

यहां आपकी जानकारी के लिए एक बात और स्पष्ट कर दू वाहन स्क्रैप डीलरो ने लुट सिर्फ जनता के साथ ही नहीं की अपितु राज्य सरकारों और भारत सरकार के राजस्व से भी बहुत बड़ी लूटमार की है और यह सब उन्होंने किया है राज्यों के परिवहन विभाग के आला अधिकारियों की मिलीभक्त से।

आपकी जानकारी के लिए बता दूं *लूटमार करवाने में नंबर वन पर जो राज्य परिवहन विभाग है उसका नाम है दिल्ली परिवहन विभाग* जी हां पूरे देश में जितनी लूटमार हुई है उसका 50% से अधिक की लूट करवाने में भूमिका निभाने का श्रेय सिर्फ दिल्ली परिवहन विभाग के आला अधिकारियों का है।

*सबसे बड़ी सोचने योग्य बात यह है की इस स्कैम और सरकारी राजस्व से लूटमारी की पूरी जानकारी भारत सरकार के गृह मंत्री, गृह मंत्रालय, उपराज्यपाल दिल्ली, मुख्य सचिव दिल्ली, दिल्ली सरकार, सीबीआई, पुलिस कमिश्नर दिल्ली पुलिस, एंटीकरप्शन विभाग, विजीलेंस विभाग, तक को है उसके बावजूद किसी के भी द्वारा सरकारी राजस्व की लूट, जनता से लूट के साथ जनता की सुरक्षा में सेंध जैसा गंभीर मामला होने के बावजूद इसमें लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही तक करने की कोशिश नहीं की?* 

इस लूटमार की कीमत आंकी जाएगी तो यह अरबों रुपए में है क्या इसीलिए सब कुछ जानते हुए भी सब चुप है और कार्यवाही करने से पीछे हट रहे है ?

क्या जनता की सुरक्षा में सेंध,
सरकारी राजस्व में लुट,
जनता से लूट,
और सरकारी पद की ताकत का दुरूपयोग कानून की दृष्टी में सजा के पात्र नहीं हैं ?

अगर भारत सरकार, गृह मंत्रालय, उपराज्यपाल दिल्ली, दिल्ली सरकार इस गंभीर मुद्दे और स्कैम पर चुप्पी साधे बैठे हैं तो भारत देश की उच्चतम न्यायालय को इस पर तत्काल संज्ञान लेना नहीं बनता आखिर वो भी चुप क्यों ?
अरबों रुपयों के स्कैम के बावजूद क्यों चुप हैं गृह मंत्रालय?
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